रूबरू | Part 9 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
मिस्टर बॉस मरने के लिए तैयार हो जाएं... क्योंकि आपकी मौत अशमारा हमीद के हाथों लिखी है।
अशमारा मन ही मन सोचती है और आगे का प्लान बनाने लगती है।
...
हां अशमारा, बात सुनो...फोन उठते ही हिना जल्दी से कहती है।
बोलो क्या हुआ?
बॉस की दादी के केयरटेकर के लिए इंटरव्यू हो रहा है।
क्या? जल्दी बताओ कब? ये तो बहुत अच्छा चांस है...
रजिस्ट्रेशन पहले से हो चुका है। अभी इंटरव्यू चल रहा है।
तुम यह इंटरव्यू नहीं दे सकतीं, और आगे कोई वैकेंसी नहीं है। इसलिए तुम वहां पर जॉब करने का इरादा छोड़ो, और अपने काम पर फोकस करो। हिना उसे समझाती है।
मुझे आफिस का एड्रेस भेजो, मैं अभी जाऊंगी। अशमारा तुरंत फैसला लेती है।
इस तरह जाने का कोई फायदा नहीं, लेकिन अगर तुम जाना चाहती हो तो मैं तुम्हें रोकूंगी भी नहीं। तुम एक बार जाकर अपनी तसल्ली कर लो। लेकिन वहां का नियम बहुत सख्त है।
ठीक है, मैं देख लूंगी। तुम फिक्र मत करो। अशमारा मज़बूत हुई।
और हां, साथ में अपना सामान लेकर जाना। और मेरा नाम कहीं न आए, इस बात का ख्याल रखना।
बेफिक्र रहो।
फोन रखते ही वह बैग निकाल कर अपना सामान रखने लगी। सामान रखते हुए अशमारा का दिमाग बहुत तेज़ी से चल रहा था।
...
मैम आपको इंटरव्यू की सिर्फ फॉरमैलिटी पूरी करनी है, किसी का सलेक्शन नहीं होगा। मैनेजर ने धीमी लेकिन साफ आवाज़ में कहा।
दादी उसकी तरफ देखे बिना सामने रखी फाइल उठा कर देखती हैं। और मैनेजर को इंटरव्यू शुरू करने का इशारा करती हैं।
इंटरव्यू शुरू होता है।
एक के बाद एक लड़कियां आती हैं। और इंटरव्यू देकर चली जाती हैं।
दादी तो पूरे टाइम खामोश ही बैठी थीं। जो पूछना था मैनेजर ही पूछ रहा था।
बस मैम, लिस्ट के मुताबिक सारे उम्मीदवार हो चुके हैं।
दादी उठती हैं और दरवाज़े की तरफ बढ़ती हैं।
उसी पल अचानक दरवाज़ा खुलता है।
एक लड़की तेज़ कदमों से अंदर आती है।
आप कौन? मैनेजर हैरान हुए। क्योंकि लिस्ट के हिसाब से सारी लड़कियां हो चुकी थीं।
सर यह ज़बरदस्ती अंदर आ गई हैं। वर्कर आगे आकर परेशानी से बोला।
आपको शायद आफिस के नियमों का पता नहीं। मैनेजर नाराज़ हुए।
मुझे इस जॉब की सख्त ज़रूरत है। वह मैनेजर की बात अनसुना करते हुए अपनी बात कहती है।
सर इनका रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। मैं कब से इन्हें समझा रहा था कि यह अचानक से अंदर चली आईं।
मुझे बस एक मौका चाहिए।
वह पहली बार दादी की तरफ देखती है।
बाहर निकालो इसे।
मैनेजर झुनझुला कर कहता है।
रूको...
तभी दादी तेज़ आवाज़ से कहती हैं।
ज़िम्मेदारी अच्छे से निभाओगी? दादी ने उसे सर से पैर तक देखा।
जी...अशमारा ने फाइल आगे बढ़ाई।
दादी ने फाइल मैनेजर को थमा दी।
सामान है साथ में?
जी...
नाम क्या है?
अशमा...
मायरा... उसके मुंह से अशमारा पूरी होता उससे पहले ही मैनेजर पेपर पर नाम देखकर बोल देता है। और वह सुकून की सांस लेती है।
इसको एग्रीमेंट पेपर दे दो। दादी मैनेजर से कहती हैं।
लेकिन मैम...मैनेजर को समझ नहीं आ रहा था कि यह अचानक दादी को क्या हो गया। और वह दादी को कैसे मना करे।
दादी...मैनेजर बेबस हुआ।
एग्रीमेंट पेपर...दादी सख्त हुईं।
मैनेजर वहां पर रखी फाइल उठा कर उसमें से पेपर निकाल कर अशमारा की ओर बढ़ाता है।
इसे पढ़ लें, फिर साइन करें।
साइन कहां करना है? वह झुक कर टेबल पर रखी पेन उठा कर बोली।
बिन पढ़े साइन... वह हैरान हुए।
मौत का फरमान थोड़े है। वह पेपर पर देखने लगी।
मैनेजर उंगली रखते जाते हैं वह साइन करती जाती। उन पेपरों पर क्या लिखा है उसे इससे कोई मतलब नहीं था, उसे तो ब्लैक हाउस पहुंचना था।
चलो... दादी आगे बढ़ी, और पीछे-पीछे वह...
दादी के साथ एक लड़की जा रही है, उस पर नज़र रखो। दादी के जाते ही मैनेजर ब्लैक हाउस के सिक्योरिटी गार्ड को फोन से खबर देता है।
आप जानते हैं यह हमारे लिए कितना ख़तरनाक है। गार्ड परेशान हुए।
यह दादी का फैसला है। जिसे हमें मानना है, लेकिन हमें हर हाल में उनकी ज़िंदगी की हिफाज़त भी करना है। मैनेजर ने हुक्म दिया।
ओके सर...
...
जैसे ही गाड़ी गेट से अंदर दाखिल हुई, अशमारा की नज़र सामने खड़ी उस भव्य इमारत पर पड़ती है।
ब्लैक हाउस- एक विशाल हवेली, जिस पर व्हाइट स्टोन जड़ा हुआ था।
ढलती धूप की किरणें उन पत्थरों से टकराकर ऐसे चमक रही थीं, मानो हवेली खुद अपनी मौजूदगी का ऐलान कर रही हो।
गाड़ी रूकते ही गार्ड फुर्ती से गेट खोलता है।
दादी उतरती हैं, और अशमारा भी उन के साथ बाहर आती है।
अंदर तक पहुंचने का रास्ता ही इतना लंबा था कि अशमारा के मन में एक हल्की-सी मुस्कान उभर आई।
जितना चल कर मैं यहां तक आई हूं, इतने में तो मैं एक मुहल्ले से दूसरे मुहल्ला पार कर लेती, वह मन ही मन सोचती है। और दादी के पीछे-पीछे चलती रही।
हर तरफ सलीके से सजी दीवारें, ऊंची छतें और अनुशासन से खड़े लोग-
यह घर नहीं किसी नियम से चलती दुनिया जैसे लगता था।
दादी एक कमरे का दरवाज़ा खोल कर अंदर जाती हैं। और फिर रुक कर उसकी ओर देखती हैं।
गरारा के साथ शॉर्ट कुर्ता, कंधे पर सलीके से रखा मैचिंग दुपट्टा, सिर पर बंधा स्कार्फ,
बिना मेकअप के भी उसकी बड़ी-बड़ी आंखों और सादा चेहरा कुछ ऐसा असर छोड़ जाते हैं कि दादी की निगाहें एक पल को ठहर जाती हैं।
वह अनजाने ही एक बार फिर उनके दिल में उतर जाती है।
यह तुम्हारा कमरा है, तुम यहां केयरटेकर की हैसियत से नहीं, मेरी दोस्त की बेटी बनकर रहोगी। वह बात शुरू करती हैं। तुम यहां किसी भी स्टाफ से काम के इलावा कोई बात नहीं करोगी।
तुम हर वक्त मेरे साथ रहोगी। उनकी निगाहें अभी भी उस पर थी।
शायद अपने फैसले पर यकीन की मुहर लगा रही थीं।
आओ तुम्हें अपना कमरा दिखा दूं। मन में आ रही उलझनों को झटक कर कहते ही वह बाहर निकल गईं।
उसके कमरे के बाद एक कमरा था, उसके बाद वाले कमरे का दरवाज़ा खोल कर वह अंदर जाती हैं। और सोफे पर बैठ जाती हैं। बैठते ही वह पीछे सिर टिका कर आंख बन्द कर लेती हैं।
मेरे बच्चे, मुझे पता है, मेरे इस फैसले से तुम बहुत नाराज़ होगे। वह मन ही मन सोचती हैं। और आंख खोल देती हैं। एक बार फिर नज़र उस पर गई।
वह वैसे ही चुपचाप खड़ी थी।
आओ बैठो... वह उसे इशारा करती हैं।
नहीं मैं ठीक हूं। जो भी हो, वह है तो उनकी केयरटेकर ही।
यह मेरा हुक्म है...
वह चुपचाप बैठ जाती है।
टेबल पर रखी बेल को दबाते ही एक लड़की आकर खड़ी हो गई।
चाय पियोगी? दादी उसकी ओर देखती हैं।
नहीं...
फ्रूट्स लेकर आओ।
दादी के कहते ही वह लड़की बाहर चली जाती है।
थोड़ी ही देर में फ्रूट्स और स्नैक्स लेकर वह वापस आती है। सब कुछ टेबल पर रख कर प्लेट में निकाल कर उनकी तरफ बढ़ाती है। दादी के इशारा करते ही वह बाहर निकल जाती है।
अशमारा चुपचाप धीरे-धीरे खाने लगती है।
अभी तुम अपने कमरे में जाओ, दो बजे यहां आ जाना। उसके प्लेट रखते ही दादी उससे कहकर बेल बजाती हैं।
अशमारा उठकर दरवाज़े की तरफ बढ़ती है, और वह लड़की जो फ्रूट्स लेकर आई थी, वह दोबारा अंदर जाती है।
मायरा...
मायरा... दादी दोबारा आवाज़ देती हैं।
दूसरी आवाज़ पर वह ठहर जाती है। ओह, मेरा नाम ही तो मायरा है। पहली बार उसे लगा वह उस लड़की से कह रही हैं। अब मुझे याद रखना है मेरा नाम मायरा है...वह खुद को याद दिलाती है।
आज से मैं अशमारा नहीं बल्कि मायरा हूं। वह खुद से बोली।
जी...वह वापस मुड़ी।
मैंने सही नाम लिखा ना?
जी...
ठीक है जाओ।
वह जल्दी से बाहर निकल गई।
अपने कमरे में जाकर वह सुकून की सांस लेती है। अपनी पहली कामयाबी पर वह बहुत खुश थी।
मिस्टर बॉस कहां हैं आप?... हम बहुत जल्द मिलेंगे। सोचते हुए वह लेट जाती है। और आंख बन्द कर लेती है। आंख बन्द करते ही बहुत सारे आंसू उसकी आंखों में जमा हो गए। जिन्हें वह जल्दी से साफ करती है।
...
डिनर करते ही वह दादी के साथ बाहर लॉन में चली जाती है।
मुझे आपके साथ खाना खाते हुए अच्छा नहीं लगा, आप मुझे अपनी दोस्त की बेटी क्यों बता रही हैं, मुझे नहीं पता। लेकिन मैं हूं तो एक केयरटेकर ही। दादी के साथ टहलते हुए वह धीमी आवाज़ में कहती है।
दोपहर में उनके साथ लंच करते हुए और फिर अभी डिनर करते हुए उसे अच्छा नहीं लगा था। इसलिए मन की बात वह कह देती है।
तुम्हें मेरा हर हुक्म मानना है। फिर चाहे वह तुम्हें पसंद हो या न हो, तुम को मानना पड़ेगा।
वह सख्ती से कहती हैं। और अंदर की तरफ बढ़ जाती हैं।
कमरे में जाकर वह चेंज करने चली जाती हैं। वापस आकर वह बेड पर लेट जाती हैं, और उसे इशारा करती हैं।
वहां पर तेल रखा है लेकर आओ और मेरे तलवों में लगाओ। टावेल भी लेती आना। वह तौलिए की तरफ इशारा करती हैं।
थोड़ी देर बाद, जब मुझे नींद आ जाए, तुम चली जाना।
ठीक है...कहते ही वह तेल उनके पैरों में लगाने लगती है।
जब उसे लगा कि दादी को नींद आ गई है, तब काफी देर हो चुकी थी। वह धीरे से उठकर तेल अपनी जगह पर रखकर बाथरूम में जाकर हाथ धोकर बाहर निकलती है। एक नज़र दोबारा दादी की ओर देखती है। उनके पैरों पर चादर ठीक करती है।
एक बार फिर देखती है।
दरवाज़े की ओर बढ़ती है।
दरवाज़ा बहुत धीरे से खोलकर बाहर निकल कर उतने ही एहतियात से बंद किया।
कॉरीडोर में हल्की लाइट जल रही थी।
जैसे ही वह मुड़ी...
किसी ने पीछे से उसका हाथ कस कर पकड़ लिया। उसका पूरा जिस्म सिहर उठा।
चीख गले में ही अटक गई।
अगले ही पल एक मज़बूत हाथ उस के मुंह पर था। और दूसरा उसे झटके से घुमाकर दीवार की तरफ ले जा चुका था।
सब कुछ इतना तेज़ी से हुआ कि उसे समझने का मौका ही नहीं मिला।
श्श्श्...
कान के पास किसी की सांस महसूस हुई।
ठंडी, सख्त और डर पैदा करने वाली।
उससे पहले की वह खुद को छुड़ा पाती,
वह उसे खींचते हुए पास के दरवाज़े तक ले गया।
दरवाज़ा खुला-
और तुरंत बंद।
जारी है...
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